आपातकाल की कल्पना करना भी वीभत्सकारी : अश्वनी शर्मा

25 जून 1975 को इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा देश में लगाया आपातकाल, देश के स्वर्णिम इतिहास में काले दिन के रूप में है दर्ज : अश्वनी शर्मा

राजेश कोछड़

चंडीगढ़ -आपातकाल की बरसी के मौके पर भारतीय जनता पार्टी, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल को लोकतंत्र के स्वर्णिम इतिहास के काले दिनों के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उस दिन लोकतंत्र व देश के नागरिकों की हत्या की थी। 25 जून 1975 को जो देश में घटित हुआ, जिसकी कल्पना करना भी वीभत्सकारी है। स्वार्थ के आगे लोकतंत्र को धराशाही करने का आपातकाल एक उदहारण है।
अश्वनी शर्मा ने आज ही के दिन करीब 48 साल पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा देश मे लगाए गए आपातकाल के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कांग्रेस पार्टी को हत्यारीन पार्टी बताया। 25 जून 1975 का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे काले दिन के रूप में दर्ज है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता में बने रहने के लिए देश पर आपातकाल थोपा और विरोध करने वालों को असहनीय यातनाएं दी। लोगों को जबरन घरों से उठा कर जेलों में ठूंस दिया गया, उनको दिलदहलाने वाली यातनाएं दी गई और बर्बर अत्याचार किए गए। आज विपक्षी पार्टियां भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हों, लेकिन इंदिरा गांधी ने तो लोकतंत्र की असली हत्या की थी।
अश्वनी शर्मा ने कहा कि देश के स्वर्णिम इतिहास में 25 जून 1975 को याद कर आज भी उस दिन के वीभत्सकारी दृश्य दिमाग व आँखों से सृजित हो उठते हैं, जब रात 12 बजे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आकशवाणी से घोषणा की कि महामहिम राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल लगाने का आदेश दे दिया है। इसी दिन विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोकतंत्र का गला घोंटा गयाI भारतीय जनता पार्टी तभी से इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाती आ रही है।
अश्वनी शर्मा ने कहाकि 25 जून 1975 के दिन जो देश में घटित हुआ, वो स्वार्थ के आगे लोकतंत्र को धराशाही करने का आपातकाल एक उदहारण है। उन्होंने कहाकि व्यक्तिपूजा की कांग्रेस की परिपाटी का ही परिणाम था जो कि 1974 में तत्कालीन अध्यक्ष डी. के. बरूआ ने ‘इंदिरा ही इंडिया तथा इंडिया ही इंदिरा’ जैसा नारा दिया। कांग्रेस पार्टी व उनके समर्थक बहुत अहंकार में थे, इसी तानाशाही विचारधारा में आपातकाल को जन्म दिया। उन्होंने कहाकि आज के परिवेश में कुछ तत्व अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे चर्चा करते हैं, परन्तु दुर्भाग्य से ऐसी विचारधारा चर्चा करना चाहती है, जिसने आज के दिन देश को अंधकार में धकेल दिया था। आपातकाल के लगते ही देश की मर्यादाएं रोंद दी गई। सभी के मौलिक अधिकार छीन लिए गए। सरकार का विरोध करने वाले नागरिकों को बिना किसी दोष के जेल में डाल दिया गया और घोर यातनाएं दी गई। उन्होंने कहाकि इस सब का आधार इलाहबाद उच्च न्यायलय का एक मुकद्दमा जो राज नारायण बनाम उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जाता है। न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गाँधी का रायबरेली चुनाव में पराजय घोषित की और उस पर 6 साल के लिए कोई भी चुनाव ना लड़ने का बैन ऑर्डर पास कर दिया गया। जिससे खिन्न होकर इंदिरा गाँधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी, यह आपातकाल दो वर्ष तक चला तथा देश की जनता ने इसका जवाब तत्कालीन कांग्रेस सरकार को अगले चुनाव में हर कर दिया। शर्मा ने कहाकि आज भी पंजाब में उसी तरह के आपातकाल जैसे हालात हैं और जनता आम आदमी पार्टी पंजाब की भगवंत मान सरकार से बहुत दु:खी है और आगामी चुनाव का इंतजार कर रही है।

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