ओंकार त्रिपाठी विद्या वाचस्पति (डॉक्टरेट) से सम्मानित।

कृष्ण कुमार तिवारी ब्यूरो चीफ अंबेडकर नगर

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सुपरिचित गीतकार ओंकार त्रिपाठी को विद्या वाचस्पति (डॉक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह उपाधि विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर बिहार द्वारा दिनांक 5 नवंबर 2023 को आयोजित 24वें वार्षिक अधिवेशन में प्रदान की गई। विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ की अकादमिक परिषद द्वारा ओंकार त्रिपाठी के नाम की अनुशंसा की गई थी।

श्री ओंकार त्रिपाठी मूलत अंबेडकर नगर (अयोध्या) उत्तर प्रदेश के ग्राम कमालपुर मुबारकपुर पिकार के निवासी हैं और बचपन से ही साहित्य में उनकी गहरी अभिरुचि रही है। त्रिपाठी जी की अभी तक तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिसमें एक प्रबंध काव्य और दो गीत काव्य हैं। इसके अतिरिक्त इन्होंने तीन पुस्तकों का संकलन और एक साझा संकलन का संपादन भी किया है। ओंकार त्रिपाठी अपनी साहित्यिक रचनाओं के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में भाषा और शिल्प के स्तर पर इनकी जैसी रचनाएं बहुत कम पढ़ने को मिलती हैं। इसी सारस्वत साधना और साहित्य सेवा के लिए ही उन्हें विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ ने विद्या वाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किया। ओंकार त्रिपाठी साहित्यिक संस्था साहित्य नव सृजन के अध्यक्ष हैं और शब्द सृजन संस्थान व राष्ट्रीय केसरिया हिंदू वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

इस विषय में जब त्रिपाठी जी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि भाषा की सेवा राष्ट्र की सेवा होती है। भाषा सिर्फ भाषा नहीं होती बल्कि उसमें अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के संस्कार होते हैं। मातृभाषा गंगा के पावन जल की तरह विचारों को निर्मल करती है। भाषा शास्त्र ही नहीं शस्त्र भी है। अतः मातृभाषा की साधना राष्ट्र की साधना है। मातृभाषा हिंदी हमारा गौरव है, हमारी पहचान है, हम सबका सम्मान है। अपनी मातृभाषा की सेवा हर देशवासी का कर्तव्य होता है और मैं अपने इसी कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हूं।

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