जीना इसी का नाम 💥 मेरा जीवन समाज के लिए 💥समाजसेवी स्वर्गीय ब्रजकिशोर शुक्ला

स्मृति बाल एवं व्यक्तित्व विकास संस्कारशाला केंद्र मे बच्चो नें प्रस्तुत किया रंगारंग कार्यक्रम

सर्वेश शुक्ला ब्यूरो, प्रभारी लखनऊ मंडल

लखीमपुर खीरी मे समाजसेवी स्वर्गीय ब्रजकिशोर शुक्ला ( ब्रज भवन गढ़ी रोड )स्मृति बाल एवं व्यक्तित्व विकास संस्कारशाला केंद्र( श्री राम जानकी मंदिर ईदगाह लखीमपुर ) पर ऋतुराज माधव के द्वारा प्रवास किया गया मन बहुत आनंदित हो गया जब मैं मंदिर के गेट पर पहुंच रहा था वहीं पर एक छोटी सी बच्ची अकेले खड़ी गीत गुनगुना रही थी चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है संस्कारशाला की खुशबू बाहर तक आ रही थी सायं काल 4:30 बजे जब ऋतुराज माधव ने संस्कारशाला केंद्र पर प्रवेश किया तो सभी बच्चे प्रार्थना कर रहे थे तत्पश्चात में भी प्रार्थना में सम्मिलित हो गया प्रार्थना के उपरांत सभी बच्चों का परिचय प्राप्त किया तब तक उनके डांस टीचर आ चुके थे और उनका डांस क्लास प्रारंभ हो चुका था बच्चों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया डांस क्लास होने के पश्चात उनकी योग एवं व्यायाम की क्लास प्रारंभ हो गई तत्पश्चात सभी बच्चों को राइटिंग करवाई गई राइटिंग करवाने के उपरांत बच्चों को एक से बढ़कर एक खेल खिलाएंगे बच्चों का उत्साह उमंग देखते ही बन रहा था आज बच्चों ने मेरा गाना मेरा डांस पर भी अपनी अपनी प्रस्तुति दी तथा बच्चों के द्वारा मेरे शब्दों में मेरी मां विषय पर अपने अपने मां के प्रति विचार रखे गए वाकई बच्चे बहुत ही प्रतिभावान हैं बच्चों को समय देने की जरूरत है ढाई घंटे की संस्कारशाला कैसे अपने निश्चित समय को पूरा कर लेती है पता ही नहीं चला संस्कारशाला के 40 बच्चों की अद्भुत प्रतिभा, अनुशासन,संस्कार, एवं उनके द्वारा सभी के प्रति आदर भाव यह सीख दे रहा था हम स्वयं भी अनावश्यक मोबाइल से दूरी बनाएं और बच्चों को भी अनावश्यक रूप से इस को इस से दूर रखें और उनको अपने बचपन को जीने दें उनको बताएं कि बचपन एकांकी नहीं है सामूहिक है उनको समूह में रहना सिखाए समूह में खेलना सिखाए समूह में बैठना सिखाए समूह में बात करना सिखाए और समूह में मिलकर एक दूसरे के सहयोग से कार्य करना सिखाए बड़े होने के नाते यदि हमने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभा ली तो हमारी भारत माता को जगतगुरु के सिंहासन पर विराजमान करने से कोई रोक नहीं सकता क्योंकि हमारे भारत के भविष्य या होनहार छोटे-छोटे बच्चे ही हैं एकांकी परिवारों ने और मोबाइल ने इनका बचपन छीन लिया अब जरूरत है अपने आसपास एक संस्कारशाला की और उसकी जिम्मेदारी हम सब स्वयं अपने आसपास के बड़े बुजुर्ग को लेनी चाहिए प्रारंभ में भले सातों दिन ना लगाएं लेकिन 2 दिन ही लगाएं संस्कारशाला और अपने आसपास के बच्चों को बुलाएं जिसने उनमें आपस में एक दूसरे के प्रति प्यार स्नेह एवं सामूहिक कार्य करने की भावना का जागरण हो मैं विशेष रूप से समाजसेवी स्वर्गीय ब्रजकिशोर शुक्ला जी के पौत्र समाजसेवी श्री अंकुर शुक्ला जी का धन्यवाद आभार ज्ञापित करता हूं एवं साथ ही विद्या भारती विद्यालय माधव चिल्ड्रंस एकेडमी एवं माधवगुरुकुलम छात्रावास एवं बिटिया वेलफेयर फाउंडेशन उत्तर प्रदेश का आभार धन्यवाद ज्ञापित करते हुए केंद्र संचालिका श्रीमती पूनम जायसवाल का विशेष आभार तथा श्री राम जानकी मंदिर जी के पुजारी व उनके परिवार का कोटिसा धन्यवाद भारत माता की जय🌺🌺🌺

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