पूरा नहीं हुआ डायरेक्टर की कुर्सी तीसरी बार बैठने का सपना : कानपुर कार्डियोलॉजी से विदा हुए विनय कृष्णा

डॉ विनय कृष्णा के लिए सदैव किया शिष्य परंपरा का निर्वहन : डॉ राकेश वर्मा

नए डायरेक्टर ने सेवानिवृत्त को विदाई के साथ दी यादगार गुरु दक्षिणा

चर्चा में रही आर्थिक लाभ के लालच में जोड़तोड़ ,भ्रष्टाचार और जुगाड़ की भी निवृत्ति

सुनील बाजपेई

कानपुर। आज 30 जून को सेवानिवृत्त होने पर डॉ विनय कृष्णा को कार्डियोलॉजी में विदाई दी गई। उनके स्थान पर डायरेक्टर की कुर्सी आज शुक्रवार से डॉक्टर राकेश वर्मा की हवाले हो गई। वह डायरेक्टर के रूप में कार्डियोलॉजी से जुड़े कार्यों की शुरुआत आज शनिवार से करेंगे। कार्डियोलॉजी में डायरेक्टर के पद से डॉ विनय कृष्णा के सेवानिवृत्त होने पर आयोजित किए गए उनके विदाई समारोह को संबोधित करते हुए नए स्थाई डायरेक्टर डॉ राकेश वर्मा ने इशारों इशारों में वह सब कुछ कहा जो वह
डॉ विनय कृष्णा के पूरे कार्यकाल में ना चाहते हुए भी अपनी शिष्य परंपरा का निर्वहन करने के फलस्वरूप झेलने को मजबूर हुए।
इस दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त होने वाले डॉक्टर विनय कृष्णा को ऐसी गुरु दक्षिणा भी प्रदान की जो उनकी सबसे प्रिय मानी जाती है और वह अब उसे हमेशा अपने साथ भी रख सकेंगे।
डॉक्टर विनय कृष्णा की इस विदाई समारोह के दौरान लोग आपस में कर इतने की चर्चा करते भी नजर आए, जिसमें अनेक लोगों का कहना यह भी था कि अधिक से अधिक कमाई के लालच में भ्रष्टाचार के लिए जोड़-तोड़, जुगाड़ साजिश की भी विदाई से ही ना केवल मरीजों और तीमारदारों का कल्याण होगा बल्कि नये स्थाई डायरेक्टर डॉक्टर राकेश वर्मा की संकल्प पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा और उनका समर्पण कानपुर कार्डियोलॉजी का नाम विश्व स्तर पर भी रोशन करने में अवश्य ही सफल होगा। यही नहीं
भरोसेमंद सूत्रों और कई अन्य लोगों के मुताबिक भी कानपुर कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर की महत्वपूर्ण कुर्सी को अब जोड़-तोड , जुगाड़ , साजिश और भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल चुकी है ,क्योंकि पूर्व में डॉ विनय कृष्णा जिसके बल पर और जिसके प्रयास से कानपुर कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर बनने में सफल हुए थे उन्हीं मतलब 1997 से अब तक के सेवाकाल में आज तक एक भी दिन का अवकाश नहीं लेने वाले, मरीजों को देखने के लिए रात में भी राउंड खुद लगाने वाले, विभिन्न हृदय रोगों से संबंधित हृदय ,फेफड़ा, धमनियों का सफल ऑपरेशन कर लगभग 30 हजार से ज्यादा लोगों की जान बचाने वाले, प्रतिवर्ष कम से कम 70000 से ज्यादा हृदय रोगियों को देखने वाले राष्ट्रीय स्तर के अनगिनत पुरस्कारों, प्रशस्ति प्रमाण पत्रों से सम्मानित किए जाने के साथ ही सन 2004 में भारत सरकार द्वारा भी सराहना की सर्वोच्च शब्दावली वाली सर्टिफिकेट से भी नवाजे जा चुके ह्रदय शल्य चिकित्सा क्षेत्र के अभूतपूर्व महारथी विख्यात कार्डियक सर्जन प्रोफेसर डॉक्टर राकेश कुमार वर्मा ने स्थायी डायरेक्टर के रूप में भी अपनी अमूल्यतम और प्रशंसनीय सेवाओं की शुरुआत कर दी है।

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