प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाए जाने के लिए आंकड़ों का योगदान आवश्यक: सीडीओ

अजय गुप्ता लखनऊ सुपरफास्ट न्यूज

बहराइच विभिन्न सर्वेक्षणों में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकीय आंकड़ों के संग्रहण के उद्देश्य से बृहस्पतिवार को देर शाम विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी कविता मीना ने बताया कि प्रदेश को 01 ट्रिलियन डालर इकोनामी बनाने के लिए सर्वेक्षणों में एकत्र किये गये आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण है। इन आंकड़ों का उपयोग नीति निर्माण एवं कार्यक्रम का मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिसके लिए विभिन्न संगठनों, विभागों व आमजन का सहयोग बहुत आवश्यक है। सीडीओ ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान जो आंकड़े एकत्र किये जाते हैं उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाता है, केवल सांख्यिकी उद्देश्यों के लिए ही उपयोग किया जाता है। इसलिए किसी को भी जानकारी देने में संकोच नहीं करना चाहिए।
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि सांख्यिकीय आंकड़ों हेतु कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा विभिन्न सामाजिक सर्वेक्षणों को नियमित रूप से सम्पूर्ण भारत वर्ष में सम्पादित कराया जा रहा है जिसमें प्रदेश के अन्तर्गत जनपद स्तर पर विभिन्न चयनित इकाईयों का सर्वेक्षण भारत सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा कराया जाता है। डॉ. सिंह ने बताया कि सर्वेक्षण कार्यक्रम की जानकारी न होने के कारण प्रतिवर्ष इकाईयों से आंकड़ों के संग्रहण में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता है। जिससे संग्रहित आंकड़ों का प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान वास्तविक रूप से परिलक्षित नहीं हो पा रहा है।
डीईएसटीओ डॉ. सिंह ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार 50 प्रतिशत भारत की जीडीपी में असंगठित क्षेत्र का योगदान है। जिसका न तो कोई रिकार्ड सूचीबद्ध है और न ही आंकड़ा उपलब्ध है। उन्होंने सभी सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आहवान किया कि सर्वेक्षण के दौरान आंकड़ों की संवेदनशीलता पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शुद्ध आंकड़ों के लिए आंकड़ा लेने वाले व आंकड़ा देने वाले दोनों पक्षों का संवेदनशील रहना अत्यन्त आवश्यक है। डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2021-22 में बहराइच जनपद की अर्थव्यवस्था/जिला सकल घरेलू उत्पाद रू. 18720.09 करोड़ है जो प्रदेश के जनपदों में 39वंे नम्बर पर है तथा इस आधार पर जनपद बहराइच का प्रति व्यक्ति जिला घरेलू उत्पाद रू. 32602 (वार्षिक) है। जो प्रदेश के जनपदों मंे 74वें नम्बर पर है, जो बहुत कम है। बहराइच एक कृषि प्रधान जनपद है जहां पर उत्पादन क्षमता का अच्छा स्कोप है।
डीईएसटीओ डॉ. सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश की इकोनॉमी का लक्ष्य 01 ट्रिलियन डालर को प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है कि हम सभी लोग शुद्ध आंकड़ें सामने लायें जिससे प्रदेश एवं देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सके। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से आंकड़ों का उपयोग भविष्य की योजनाओं की नीति निर्धारण हेतु किया जाता है तथा सरकार द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं की रणनीतियां बनाने में यह आंकड़े बहुत ही ़उपयोगी होते है। इन्हीं आंकड़ों के सहारे तैयार की गई योजनाएं गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण/शहरी विकास तथा आर्थिक विकास के लिए मूल्यवान योगदान प्रदान करती हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य है कि समय-समय पर जागरूकता अभियानों और कार्यशालाओं का आयोजन करके प्रदेश में राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा कराये जा रहे सर्वेक्षणों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय, गोण्डा के वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी द्वय कुलदीप कुमार यादव एवं प्रदीप कुमार प्रजापति द्वारा अनिगमित सेक्टर के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण, वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण, पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (परिवार सर्वेक्षण), राष्ट्रीय प्रतीक सर्वेक्षण तथा अपर सांख्यिकीय अधिकारी तीरथ राम द्वारा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के बारे में परिचय, उद्देश्य एवं सर्वेक्षण में एकत्रित की जाने वाली सूचनायें तथा उनके उपयोग व महत्व आदि के सम्बन्ध में विस्तार से बताया गया। कार्यशाला में उद्योग व्यापार मण्डल के पदाधिकारी द्वारा अपेक्षा की गयी कि भारत सरकार द्वारा सर्वेक्षण कराये जा रहे सर्वेक्षित ग्रामों/नगरों की जानकारी दी जाय तथा श्रमिक नेता योगेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा विभागों से अपेक्षा की गयी कि श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन करने के पश्चात ही कार्य प्रारम्भ कराया जाय जिससे बाढ आदि आपदा एवं आकस्मिक कार्यों में लगे किसी श्रमिक के साथ दुर्घटना होती है तो उसे योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके। कार्यशाला में प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच संजय शर्मा, जिला सहकारी बैंक के सभापति डॉ. जितेन्द्र त्रिपाठी, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्यान अधिकारी, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा, सहायक आयुक्त सहकारिता, सहायक श्रमायुक्त तथा कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, खादी, मण्डी, व्यापार कर, दुग्ध, पंचायत विभाग के अधिकारी, उद्योग बन्धु, व्यापार संगठन, फूड संगठन, रेस्टोरेन्ट संगठन एवं श्रमिक संगठन के पदाधिकारी, चिट फण्ड सोसाइटी के कार्मिक आदि उपस्थित रहे।

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