भारतीय मानव कल्याण समिति ने स्वामी विवेकानंद जी को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया

सौरभ तहसील प्रभारी चंदौसी

भारतीय मानव कल्याण समिति द्वारा स्वामी विवेकानंद को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित करके किया गया मुख्य वक्ता राजेश कुमार गुप्ता ने कहा अपनी तेजस्वी वाणी के जरिए पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का डंका बजाने वाले स्वामी विवेकानंद ने केवल वैज्ञानिक सोच तथा तर्क पर बल ही नहीं दिया, बल्कि धर्म को लोगों की सेवा और सामाजिक परिवर्तन से जोड़ दिया। भारतीय मानव कल्याण समिति के प्रबंधक डॉ टीएस पाल ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था।उनका बचपन का नाम नरेंद्र दत्त था,1884 में उनके पिता विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के बाद अत्यंत गरीबी की मार ने उनके चित्त को कभी डिगने नहीं दिया। संगीत, साहित्य और दर्शन में विवेकानंद को विशेष रुचि थी। तैराकी, घुड़सवारी और कुश्ती उनका शौक था।मात्र 39 वर्ष की आयु में ही 4 जुलाई 1902 ईसवी को उनका निधन हो गया। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ समाजसेवी कवि माधव मिश्र की पूज्य माताजी बृजलता मिश्र के आकस्मिक निधन पर 2 मिनट का मौन धारण करके शोक संवेदना व्यक्त की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ओम प्रकाश गुप्ता ने तथा संचालन डॉ जय शंकर दुबे ने किया।इस दौरान आकाश शर्मा,राजेश पाल, रोशनलाल दिवाकर,मुनीश बाबू वार्ष्णेय,सुशील अग्रवाल,मूकेश वार्ष्णेय,विक्रम सिंह,अशोक जोशी,दीपक आदि उपस्थित रहे

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