वार्डबंदी तैयार करते समय अफसरों ने दबाव में आकर किया फर्जीवाड़ा, अब उठ रही यह मांग

राजेश कोछड़

जालंधर -नगर निगम जालंधर के चुनाव करीब 2 माह बाद होने जा रहे हैं जिसके लिए पूरे शहर को 85 वार्डों में बांट दिया गया है और नई वार्डबंदी का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भी हो चुका है। नए बने वार्डों के नक्शे इन दिनों निगम में आम पब्लिक को दिखाए जा रहे हैं। इस दौरान आरोप लग रहे हैं कि नई वार्डबंदी को तैयार करते समय लोकल बॉडीज के अफसरों ने दबाव में आकर फर्जीवाड़ा किया है और चुनिंदा वार्डों को एस.सी. रिजर्व या जनरल करने के लिए आंकड़ों में जबरदस्त हेरफेर कर दिया गया है। पता चला है कि फर्जीवाडे की बात सामने आने पर विपक्ष में बैठे कांग्रेसी और भाजपा के नेता इस मामले को अदालत में चुनौती भी दे सकते हैं। दोनों ही पार्टियों के नेता नई वार्ड बंदी की बारीकी से जांच कर रहे हैं।वार्डबंदी तैयार करते समय अफसरों द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा उस समय पकड़ में आया, जब भाजपा नेता जौली ने इंडस्ट्रियल एरिया वार्ड संबंधी पत्रकारों समक्ष कई तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि पहले यह वार्ड नंबर 64 था जिसे अब 80 नंबर वार्ड बना दिया गया है परंतु किसी ‘आप’ नेता को एडजस्ट करने के लिए इंडस्ट्रियल एरिया वार्ड को एस.सी रिजर्व कर दिया गया है जबकि इस क्षेत्र में एस.सी. जनसंख्या काफी कम है। उन्होंने वार्ड 80 से संबंधित नक्शा देखकर बताया कि ब्लॉक नंबर 6 में कुल वोट 641, एस.सी वोट 266, जनरल वर्ग की वोटें 125 और बी.सी वर्ग की वोटें 250 बताई गई हैं जबकि सात नंबर ब्लॉक में भी यह आंकड़े बिल्कुल यही हैं।इसी प्रकार ब्लॉक नंबर 31, 32 और 33 में कुल वोट 465 और एस.सी. वर्ग की वोटें 336 दिखाई गई हैं। जनरल वर्ग की केवल 46 और बी.सी वर्ग की 83 वोटें दिखाई गई हैं। तीन ब्लॉकों में एक जैसे आंकड़े होना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि पूरे वार्ड की कुल 11687 वोट दर्शाई गई हैं जिनमें से जनरल वर्ग की वोटें केवल 2208 ही हैं । इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या इस वार्ड में कुल दलित वोटों की संख्या 9500 के करीब है जैसा कि नक्शे पर लिखा गया है । उन्होंने कहा कि यदि यह फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित अफसरों को तत्काल सस्पैंड किया जाना चाहिए।कांग्रेसी नेताओं इत्यादि ने वार्डबंदी पर ऐतराज व्यक्त करते हुए कहा है कि नक्शे में वार्ड की बाउंड्री संबंधी लोकेशन गूगल मैप से उठाई गई है जो कई स्थानों पर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन से मेल नहीं खाती इसलिए नक्शे को समझाने के लिए ड्राफ्ट्समैन की पक्के तौर पर वहां ड्यूटी लगाई जाए। यह मांग भी की गई कि हर वार्ड की जनसंख्या कास्ट के हिसाब से प्रदर्शित की जाए और आंकड़े सभी को दिए जाएं। इस बीच पता चला है कि आज भी कई और नेताओं ने वार्डबंदी पर अपने लिखित एतराज दर्ज करवाए।

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